एक लफ्ज़ रूह से बोल रहा कि क्या जीना लिखा उसमें,
जिसने तुझे जीने का दूसरा सहारा बनाया उसने,
अरे वो हुस्न की मारी पर तू तो इश्क़ का मारा हैं,
तेरी जिंदगी की मौत से मुलाक़ात करा दी उसने।
तेरी माँ की दुआ का मज़ाक बना दिया उसने,
तू सोच नहीं पाया सब कुछ तेरा छीन लिया उसने,
अरे वो बेवफ़ाओ की रानी तू मासूम सा बच्चा,
तेरी ही मासूम हरकतों को बेवफ़ाई का ज़रिया बना दिया उसने।
--सीरवी प्रकाश पंवार
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