तन्हाई के दिन ही सही मगर तुम मिलो तो कही,
झूठी बात ही सही मगर कोई करे तो कही,
जनाज़े की बात करते हो इस जमाने में,
कोई इश्क बाज माँ सही जनाज़ा निकले तो सही।
--सीरवी प्रकाश पंवार
गुरुवार, 13 अप्रैल 2017
जनाज़ा
बुधवार, 12 अप्रैल 2017
उगता हुआ सूरज....
उगता हुआ सूरज हूँ मुझे लक्ष्य मत बना लेना,
दो-चार शब्द लिखता हूँ मुझे बड़ा मत बना लेना,
बड़ी प्यास लगी हैं शब्दों की तेरी हरकतों से,
दोस्त हूँ मै तेरा मुझे अपना दुश्मन मत बना लेना।
--सीरवी प्रकाश पंवार
मंगलवार, 11 अप्रैल 2017
कभी जीत के....
कभी जीत के समंदर का एक लौटा तक नहीं चुराया,
भूखा सोया प्यासा भागा अश्क़ तक नहीं गिराया,
अरे तुम्हे मेरी जीत मुकम्मल क्यों नहीं होती,
पर कभी जीत की ख़ुशी में एक दीप तक नहीं जलाया।
--सीरवी प्रकाश पंवार
रविवार, 9 अप्रैल 2017
जो गीत....
जो गीत कागजो में नहीं था वो एक बूँद से बिख़र गया,
जो धागे रूह तक नहीं था वो एक शब्द से टूट गया,
फिर तो हरकतों को मेरे ही हवाले किया जाना था,
क्योकि जो हक़ीक़त में नहीं था उसे हरकतों में लाया गया.
-सीरवी प्रकाश पंवार
शनिवार, 8 अप्रैल 2017
मोहब्बत की दीवारे...
मोहब्बत की दीवारों में ज़मानत कहा खो गयी,
तेरी अल्फाज़ो की रातों में नाराजगी कही खो गयी,
मेरे से बेवफ़ाई की वजह मत उगलवा,
देख तेरी जिंदगी हवालात की कैसे हो गयी।
--सीरवी प्रकाश पंवार
शुक्रवार, 7 अप्रैल 2017
हम इतने महशूर
हम इतने महशूर भी नहीं कि अखबारो की आवाज़ बने,
इतने इश्क़बाज भी नहीं कि तेरे दिल की जमीं बने,
तुम फस गयी हो इश्क़ के बाजारवाद की दुनिया में,
पर हम इतने मोहताज़ भी नहीं कि खड़े ना हो सके।
--सीरवी प्रकाश पंवार
गुरुवार, 6 अप्रैल 2017
तेरी जिंदगी की मौत से मुलाक़ात....
एक लफ्ज़ रूह से बोल रहा कि क्या जीना लिखा उसमें,
जिसने तुझे जीने का दूसरा सहारा बनाया उसने,
अरे वो हुस्न की मारी पर तू तो इश्क़ का मारा हैं,
तेरी जिंदगी की मौत से मुलाक़ात करा दी उसने।
तेरी माँ की दुआ का मज़ाक बना दिया उसने,
तू सोच नहीं पाया सब कुछ तेरा छीन लिया उसने,
अरे वो बेवफ़ाओ की रानी तू मासूम सा बच्चा,
तेरी ही मासूम हरकतों को बेवफ़ाई का ज़रिया बना दिया उसने।
--सीरवी प्रकाश पंवार
बुधवार, 5 अप्रैल 2017
कोई अल्फ़ाज जुड़ा....
कोई अल्फ़ाज जुड़ा था तुझसे जो गीत बन गुनगुना रहा हैं,
कोई अश्क़ जुड़ा था तुझसे जो इश्क़ बन बह रहा हैं,
आँखों में तेरा एक राज लिखा था जो तू चुरा रही हैं,
पर एक हुस्न जुड़ा था तुझसे जो कही टूट कर तड़प रहा हैं।
--सीरवी प्रकाश पंवार
गुरुवार, 30 मार्च 2017
ऐ खुदा मेरे पलड़े में मौत लिख दे
ऐ खुदा मेरे पलड़े में मौत लिख दे,
या मेरी किस्मत का नया आयाम गढ़ दे,
कल भी हारा था आज भी हारा हूँ,
मेरी किस्मत में बस एक जीत लिख दे,
पलकों को कभी जपकया तक नहीं,
फिर यह आँखों के सामने दीवार क्यों?
दिल कभी किसी का दुखाया तक नहीं,
फिर यह आँखों में खालीपन का अहसास क्यों?
अश्क़ हर पल यही पूछते मेरे से कि,
सब कुछ किया भूला कुछ भी नहीं,
फिर भी इन आँखों में वो उम्मीद क्यों?
--सीरवी प्रकाश पंवार