हीरो की चमक आजकल रहने कहा दी,
परिंदों को उड़ाने आंखिर उड़ने कहा दी,
जो घर-घर फर्जी परिंदों के घरौंदे बनाए बैठे हो,
रूह पर कपडे की रौनक रहने कहा दी।
--सीरवी प्रकाश पंवार
गुरुवार, 15 जून 2017
हीरो की चमक आजकल .....
बुधवार, 14 जून 2017
शुक्रवार, 9 जून 2017
तुम दो फ़लक..
तुम दो फ़लक ख़त के लिख कर यू ही मत बिख़र जाना,
तुम उम्मीद बने हो किसी की यू ही मत टूट जाना,
न मिला अग़र कुछ भी फिर वो माँ तो पास रहेंगी तेरे,
तुझे जीना हैं अपनों के लिए यू ही मत रूठ जाना।
--सीरवी प्रकाश पंवार
This is a crime on your parents.
बेवज़ह सोये..
बेवजह सोये पंछी को छेड़ा नहीं जाता,
ना मिले अग़र कुछ भी तो रोया नहीं जाता,
आंखिर वो वजूद ही क्या रखता जो न हो हमारा,
जो न ढूंढे किसी को तो पाया भी नहीं जाता।
--सीरवी प्रकाश पंवार
सोमवार, 5 जून 2017
हाथों की लकीरों में...
अक़्सर हाथों की लकीरों में जो ख़ुद को ढूंढा करता हूँ,
जो रूप गढ़ा था एक अबला ने उसे बनाया करता हूँ,
मुझे बस मोहलत मत देना ख़ुदा की ख़ुद के हाथों मौत लिख लू,
उन लकीरों में ख़ुद को पाकर अक़्सर पराया समझता हूँ।
--सीरवी प्रकाश पंवार
रविवार, 4 जून 2017
कभी पढ़ लिया.....
कभी हस लिया करता हूँ खुद को आईने में देख कर,
कभी पढ़ लिया करता हूँ खुद को अकेला देख कर,
यह दो पल की चीजें आंखिर कब पूरी होंगी,
कभी रो भी लिया करता हूँ हाथो की लकीरें देख कर।
--सीरवी प्रकाश पंवार
गुरुवार, 18 मई 2017
क्या ग़लती...papa
क्या ग़लती थी आपकी नहीं जानता मै,
क्या दुःख था आपका नहीं समझा मै,
हालातों ने बहुत दूर कर दिया खुद को आपसे,
कुछ कर बैठा हूँ ग़लत बस यह मानता मै,
ऐ खुदा
माफ़ मत करना मुझे, बेसहारा किया मैने...
अपने ही हाथों लकीरे, बनाई खुद में मैने...
शायद ग़लती तो उनकी, दुनिया दिखाने की रही होंगी...
मग़र बेवज़ह खुद को, खुद से अलग किया मैने...।
--सीरवी प्रकाश पंवार
18 मई 2017 {आज मै २ साल का हुआ।}
Love you papa
बुधवार, 17 मई 2017
शायद तेरा अकेलापन...
शायद तेरा अकेलापन बहुत कुछ कह जाता हैं,
आँसुओ को आँखों में ही रोक जाता हैं,
भूल जाता हूँ खुद को अपनों की हरकतों से,
फिर तुझे चुप देखकर लफ्ज़ भी टूट जाता हैं।
बहुत कुछ बताया हैं तेरे इन नयन समंदर ने,
बहुत कुछ पाया हैं तेरी इस खामोशी में,
जब साथ हो तुम तो डर न लगा हर मोड़ पर,
हर राह पर चलाया हैं तेरी इन हरकतों ने,
--सीरवी प्रकाश पंवार
सोमवार, 15 मई 2017
जो हो नहीं सकता...
जो हो नहीं सकता उसे क्या अख़बार का रूप दूँ,
जो रो नहीं सकता उसे क्या रुठने की वजह दूँ,
तेरी हरकतों का आदी हूँ मै; मुझे तो जमाना जीतना हैं,
जिसे खो नहीं सकता उसे क्या सवालों का जवाब दूँ।
--सीरवी प्रकाश पंवार
For dear cute(-_-;)