शुक्रवार, 7 अप्रैल 2017

हम इतने महशूर

हम इतने महशूर भी नहीं कि अखबारो की आवाज़ बने,
इतने इश्क़बाज भी नहीं कि तेरे दिल की जमीं बने,
तुम फस गयी हो इश्क़ के बाजारवाद की दुनिया में,
पर हम इतने मोहताज़ भी नहीं कि खड़े ना हो सके।
--सीरवी प्रकाश पंवार

गुरुवार, 6 अप्रैल 2017

तेरी जिंदगी की मौत से मुलाक़ात....

एक लफ्ज़ रूह से बोल रहा कि क्या जीना लिखा उसमें,
जिसने तुझे जीने का दूसरा सहारा बनाया उसने,
अरे वो हुस्न की मारी पर तू तो इश्क़ का मारा हैं,
तेरी जिंदगी की मौत से मुलाक़ात करा दी उसने।

तेरी माँ की दुआ का मज़ाक बना दिया उसने,
तू सोच नहीं पाया सब कुछ तेरा छीन लिया उसने,
अरे वो बेवफ़ाओ की रानी तू मासूम सा बच्चा,
तेरी ही मासूम हरकतों को बेवफ़ाई का ज़रिया बना दिया उसने।
--सीरवी प्रकाश पंवार

बुधवार, 5 अप्रैल 2017

कोई अल्फ़ाज जुड़ा....

कोई अल्फ़ाज जुड़ा था तुझसे जो गीत बन गुनगुना रहा हैं,
कोई अश्क़ जुड़ा था तुझसे जो इश्क़ बन बह रहा हैं,
आँखों में तेरा एक राज लिखा था जो तू चुरा रही हैं,
पर एक हुस्न जुड़ा था तुझसे जो कही टूट कर तड़प रहा हैं।
--सीरवी प्रकाश पंवार

गुरुवार, 30 मार्च 2017

ऐ खुदा मेरे पलड़े में मौत लिख दे

ऐ खुदा मेरे पलड़े में मौत लिख दे,
या मेरी किस्मत का नया आयाम गढ़ दे,
कल भी हारा था आज भी हारा हूँ,
मेरी किस्मत में बस एक जीत लिख दे,

पलकों को कभी जपकया तक नहीं,
फिर यह आँखों के सामने दीवार क्यों?
दिल कभी किसी का दुखाया तक नहीं,
फिर यह आँखों में खालीपन का अहसास क्यों?
अश्क़ हर पल यही पूछते मेरे से कि,
सब कुछ किया भूला कुछ भी नहीं,
फिर भी इन आँखों में वो उम्मीद क्यों?
--सीरवी प्रकाश पंवार

शनिवार, 18 मार्च 2017

एक गीत रचा हैं मैने....

एक गीत रचा हैं मैने........
एक गीत सुना हैं तूने..........
फिर याद मेरी यू आई,
आँखों से आँसू निकला,
एक गीत रचा हैं मैने...............

वो दिन क्या याद हैं तुझको,
आँखों से मिलन हुए थे,
वो दिन क्या याद हैं तुझको,
जी भर हस कर रोए थे,
जब बात आई अपनों की,
मेने तोड़ा था बंधन पुराना,
एक गीत रचा हैं मैने.......................

एक बात तू याद रखना,
हाथों में हाथ ना दिखेंगे,
एक पल तू याद रखना,
अब बात ना तेरी करेंगे,
तेरी इस बेवफाई को,
मै जन्म-जन्म न भूलूँगा
एक गीत रचा हैं मैने.................
--सीरवी प्रकाश पंवार

शनिवार, 4 मार्च 2017

जरूरी नहीं था ........

ज़रूरी नहीं था की दुनिया के रंग देखूँ,
ज़िगर का टुकड़ा बनाना भी ज़रूरी नहीं था,
बस ज़रूरी था की तेरे गर्भ में पल भर रहूँ,
वैसे तो बेटी कहना भी तो ज़रूरी नहीं था,

सही कहाँ है किसी ने की किस्मत खुदा के हाथ  में,
मेरा खुदा भी तू और जीना भी तेरे हाथ में,
शायद मेने जहाँ के रंग कुछ पहले छेड़ दिए होंगे,
कि रंग देखने के पहले तूने ज़मी में दफ़ना दिया।

शायद खुदा होने नाते माँ तूने मेरा भविष्य देखा होंगा,
कभी लकीरों की आड़ में तो कभी दुष्कर्म की आड़ में जला होंगा,
मान लुंगी माँ लकीरों के आगे तेरी भी मज़बूरी रही होंगी,
फिर भी माँ लकीरों की आड़ में तो भरोसा जलाया होंगा।
--सीरवी प्रकाश पंवार

मंगलवार, 28 फ़रवरी 2017

"सुखा बारूद"

              "सुखा बारूद"

हर रोज फूल सा खिलने की चाहत थी उसकी,
सूखे बारूद को को अंगारे की चाहत थी उसकी,
बेवजह बारिश कर क्या कर दिया तूने,
सूखे बारूद को गीला कर दिया तूने।

अगर हाथ माँगा होता तो हाथ थमा देता,
विश्वास माँगा होता तो ज़माना थामा देता,
फिर पेड़ नंगा करके यह क्या कर दिया तूने,
दिल माँगा तो ज़माने से रिहा कर दिया तूने।
--सीरवी प्रकाश पंवार
(हल ही DU घटना से प्रेरित,वीर जवान की बेटी के लिए)


शनिवार, 18 फ़रवरी 2017

यह आँखों में आंसू नापाक......

यह आँखों में आंसू नापाक हरकतों के हैं,
यह आँगन में लकीरे ज़िहाद की हैं,
ज़रा पीछे मुड़ के देख तेरा जहा खड़ा हैं...
यह हाथों में कलम नाजायज़ हरकतों की हैं।
--सीरवी प्रकाश पंवार

सोमवार, 6 फ़रवरी 2017

मुझे अहसास हुआ हैं.....

मुझे अहसास हुआ हैं की,
तुमने तीर चलाया हैं,
इश्क की बात छोड़ तुमने,
बेवफाई सामने लायी हैं,
फिर कहोगी सीरवी तुम,
तर्क-वितर्क करते हो,
मुझे मत कौस ऐ पागल,
तूने आपनो का सहारा लिया हैं।

कितनी कश्ती डूबी होंगी,
तेरे हुस्न की बहारों में,
मेने तो बचने का सहारा लिया,
तेरी बेवफाई अदाओं से।