शुक्रवार, 22 सितंबर 2017

शहरों के इन अंधेरों से ...................

निकाला तो...
परछाईयों में खो गयी कही तुम,
अफ़साने से लफ्ज़ो से निकाला तो...
बेवजूद बातों में खो गयी कही तुम,
आंखिर कब तक ढूँढू में.....
ईश्क के इन पागल शहरों में,
बेवजूद जहाँ से निकाला तो..
मेरे दिल की ज़मी में खो गयी कही तुम।
--सीरवी प्रकाश पंवार
Dear cute


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उम्मीदों के चेहरे.....................

उम्मीदों के चेहरे पर उम्मीद की एक लक़ीर दिखी,
सालों से तप्त ज़मी पर पानी की उम्मीद दिखी,
जिनके आगे ना पीछे फिर न जाने क्यों जीते वो लोग,
फिर मुझे बेवफा के चेहरे पर वफ़ा की उम्मीद दिखी।
--सीरवी प्रकाश पंवार

साहब..... शहर में कुछ अशांति सी दिख रही.....................

साहब.....
शहर में कुछ अशांति सी दिख रही,
कोई बोल रहा था कि....
जो किया वो अच्छा ही था,
मगर कोई बोल रहा हैं...
चौखट के बाहर निकाली ही क्यों?.
अग़र टूट गयी कही तो,
हाथों की उम्मीद न होंगी...
अगर रो गयी कही तो,
सूखे गालों की उम्मीद न होंगी...
यह राह तो जाना पहचाना था,
पर राही थी अकेली....
सब कुछ तो अपना ही था,
मगर मैदान में थी अकेली....
यहाँ आंखों के आशियाने लिए,
बहूत सारे बैठे होंगे.....
मग़र वो हर पल बेवफाई के पानी लिए,
आँखे भिगोने वाले होंगे...
आकाश में उड़ता हुआ पंछी बारिश में,
बादलो की आहट में नहीं छुपता,
मग़र तेरी अदित्य रूह के लिए,
तेरे अपने भी खड़े होंगे.....
--सीरवी प्रकाश पंवार
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तेरी यह अलग सी पहचान..



"तेरी यह अलग सी पहचान..."
(Dear cute)
अग़र खड़ा हूँ कही तो,
एक अद्रश्य प्रतिबिम्ब हूँ,
जो अमिट हूँ कही तो,
सूरज की हरकतों में हूँ,
इस बेदाग से....
रूह की पहचान,
तेरे हीरों से उसूलों से जड़ित हैं....
इन अमापित सी....
ऊचाईयों की पहचान,
तेरे अद्वित्य सी हरकतों से अमिट हैं....
एक सवाल सा खड़ा कर देती,
तेरी यह अज़ीब से पहचान....
पर मुझे अजीब सा बना देती,
तेरी यह अलग सई पहचान....
वक्त बदल गया मगर....
मै तुम वही के वही,
पर वक्त के आगे भी अलग बना देती हैं,
तेरी यह अज़ीब से पहचान...
--सीरवी प्रकाश पंवार
For dear cute

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कोई लिख रहा..............

कोई लिख रहा हैं हमकों, हमे मंझूर तो हैं...
थोड़े पागल थोड़े मासूम हम, हमे मंझूर तो हैं...
हालातों से जले हैं मगर बंजर तो नही,
थोडा सरल बहुत कठीन हम, हमे मंझूर तो हैं....
--सीरवी प्रकाश पंवार

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आँखों की उम्मीद को ..............

आँखों की उम्मीद को तुम अख़बार मत बनाना,
जो बह जाए आँसू में, उसे इंतज़ार मत बनाना !!
रुख बदलती हवाओं का वज़ूद सिर्फ़ आंधी होती हैं,
पर जो बदल जाए पल भर में, उसे ख़्वाब मत बनाना !!
~सीरवी प्रकाश पंवार
Dear cute..


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मै गहरा समंदर हूँ...............

कुछ पलो की नाराजगी से तुम खुद पर दाग मत समझना,
जो ना मिलु पल भर तो खुद को अकेली मत समझना,
मै गहरा समंदर हूँ जिसका मुक्कमल किनारा कही गायब हैं,
मै पल भर सो जाँऊ तो खुद का पराया मत समझना।
--सीरवी प्रकाश पंवार

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मरहम लगा दे ज़ख्मो पर.................



मरहम लगा दे ज़ख्मो पर,
तड़प रहा में तेरे लफ्ज़ो पर,
एक रूप जड़ा था आँखों में,
बह रहा हैं आज अश्क़ों में,
धूप पड़ी तेरे हाथों पर,
छवि बना दे मेरे हाथो पर,
आँख लगी हैं तेरी आहट से,
ज़रा धड़कन बढ़ा दे तेरे होठो से,
बेरूप से इन सुखों को पानी की ज़रूरत हैं,
भीगे इन नैनों को हाथों की ज़रूरत हैं,
मुझे मंजूर नहीं इश्क़ की ये आंधी सी हवाएँ,
मगर रूखे इस हुस्न को इश्क़ की ज़रूरत हैं।

--सीरवी प्रकाश पंवार

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सपनों ही सपनों में ............

सपनों ही सपनों में एक ग़ज़ब सा खेल रच गया,
आँखों की उलझनों में हाथों का धागा(राखी) खो गया,
अग़र लिख लिए दो अल्फ़ाज तो माँ शर्मिन्दा हो जाएंगी,
अग़र न लिखा अल्फ़ाज तो समझों कलम से अनर्थ हो गया।
--सीरवी प्रकाश पंवार

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